आंखों में जलन, खुजली व असहजता महसूस हो या दिखने में धुंधलापन लगे तो ये ड्राई आई के लक्षण हो सकते हैं। यह रोग दो प्रकार का होता है, अस्थायी और क्रॉनिक (ड्राई आई सिंड्रोम)। यदि इसका समय पर इलाज न कराया जाए तो संक्रमण होने व रोशनी जाने का खतरा रहता है।
अस्थायी ड्राई आई : एयर कंडीशनर (एसी) में लंबे समय तक रहने, ठंडी हवाओं और घंटों स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से भी ऐसा हो सकता है।
क्रॉनिक ड्राई आई : पलकों की सबसे बाहरी परत तैलीय होती है जो आंसुओं को तेजी से वाष्पीकृत होने से रोकती है। यदि ये परत सूखने लगे तो ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या हो सकती है।
प्रमुख उपाय -
एयर कंडीशनर में लंबे समय तक न बैठें। आंखों के लिए लुब्रीकेंट्स का प्रयोग करें। थोड़ी-थोड़ी देर में पलकों को झपकाते रहें। कम्प्यूटर या लैपटॉप पर काम करते समय एंटीग्लेयर चश्मे का प्रयोग करें। दिन में तीन से चार बार आंखों को ठंडे पानी से धोएं। गंदे हाथों से आंखों को न छुएं। ज्यादा तकलीफ होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।
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